*कचरे से ‘सोना शाहपुर नगर परिषद ने पेश की स्वच्छता व संसाधन प्रबंधन की नजीर, 4 रुपये किलो में मिल रही जैविक खाद*

बुरहानपुर :- घरों और दुकानों से निकलने वाला कचरा, जिसे अक्सर अनुपयोगी मानकर फेंक दिया जाता है, अब शाहपुर में एक उपयोगी संसाधन बन चुका है। नगर परिषद शाहपुर ने वैज्ञानिक कचरा प्रबंधन के जरिए ‘कचरे से जैविक खाद’ बनाने की एक सराहनीय पहल शुरू की है। यह प्रयोग न केवल शहर को स्वच्छ और सुंदर बना रहा है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और संसाधनों के सही सदुपयोग का उत्तम उदाहरण भी पेश कर रहा है।
*सुबह से शुरू होती है स्वच्छता की कमान*
नगर परिषद में रोजाना सुबह 60 सफाई मित्र और 10 वाहन चालक प्रांगण में एकत्रित होते हैं। निर्धारित रूट चार्ट के अनुसार 9 कचरा संग्रहण वाहन शहर के सभी 15 वार्डों, दुकानों, होटलों और सब्जी मंडी से कचरा एकत्रित करते हैं। नागरिकों द्वारा गीला कचरा हरे और सूखा कचरा नीले डिब्बे में देने से इस प्रबंधन को काफी गति मिलती है।
*पृथक्करण और 45 दिनों में खाद का निर्माण*
संग्रहित कचरे को ट्रेंचिंग ग्राउंड लाया जाता है। यहाँ सफाई मित्र सुरक्षा उपकरणों मास्क व दस्ताने के साथ कचरे का पृथक्करण करते हैं सूखा कचरा जैसे प्लास्टिक, कांच, कागज और धातु को अलग कर रीसाइक्लिंग के लिए भेजा जाता है गीला कचरा फल सब्जियों के छिलके, भोजन व जैविक अपशिष्ट को कम्पोस्ट शेड में विंडरो पद्धति से रखा जाता है। इसमें छाछ व गुड़ के पानी के कल्चर का छिड़काव कर नमी और तापमान नियंत्रित किया जाता है। नियमित पलटाई के बाद लगभग 45 दिनों में पोषक तत्वों से भरपूर जैविक खाद बनकर तैयार हो जाती है।
*किसानों को लाभ और नगर का विकास*
छनने के बाद तैयार खाद की 50 किलोग्राम की पैकिंग की जाती है। ‘जैविक खाद- नगर परिषद शाहपुर’ ब्रांड के तहत इसे 4 रुपये प्रति किलोग्राम 200 रुपये प्रति बैग की रियायती दर पर किसानों, नर्सरियों और स्थानीय नागरिकों को बेचा जा रहा है।

इस बिक्री से होने वाली आय का सीधा उपयोग नगर परिषद द्वारा क्षेत्र की मूलभूत सुविधाओं व विकास कार्यों में किया जा रहा है। शाहपुर का यह मॉडल साबित करता है कि जनभागीदारी और सही प्रबंधन से कचरे को भी बहुमूल्य संसाधन में बदला जा सकता है।



