*बुरहानपुर में खाद्य विभाग की खानापूर्ति गंभीर अनियमितताएं मिलने के बाद भी होटल संचालकों पर मेहरबान अधिकारी थमाए गए सिर्फ कागजी नोटिस*

बुरहानपुर:- बुरहानपुर में जिला प्रशासन और खाद्य सुरक्षा विभाग के दावों की पोल एक बार फिर खुल गई है। शहर के नामचीन होटल, रेस्टोरेंट और ढाबों पर चल रहे गंभीर मिलावट और घोर लापरवाही के खेल पर अब तक केवल कागजी खानापूर्ति ही हो रही है। कलेक्टर हर्ष सिंह के निर्देश पर खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग की टीम ने औचक निरीक्षण के नाम पर सिर्फ औपचारिकताएं निभाईं। जिले के इन प्रतिष्ठित भोजनालयों के किचन में फैली भयंकर गंदगी और नियमों की धज्जियां उड़ाए जाने के बावजूद अधिकारियों ने महज नोटिस थमाकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया है।
*किचन में सड़ रहा था सामान अधिकारियों ने दिखाई मेहरबानी*
निरीक्षण अभियान के दौरान खाद्य सुरक्षा अधिकारी कमलेश डावर की टीम ने शनवारा स्थित गारवा बिरयानी, अंबिका होटल, किनारा होटल, और वृंदावन ढाबे सहित कई ठिकानों का दौरा किया। हैरानी की बात यह है कि इन सभी जगहों के रसोईघरों में साफ-सफाई का पूर्ण अभाव और मानकों की सरेआम धज्जियां उड़ाई जा रही थीं। इसके बावजूद, इन रसूखदार प्रतिष्ठानों पर कोई सख्त दंडात्मक कार्रवाई करने के बजाय अधिकारियों ने सिर्फ धारा 32 का नोटिस देकर औपचारिकता पूरी कर दी। जनता की सेहत से खिलवाड़ करने वाले इन होटल संचालकों पर मेहरबानी का यह खेल बुरहानपुर में चर्चा का विषय बना हुआ है।
*सैंपल रिपोर्ट और नोटिस के नाम पर टालमटोल*
महज कागजी कार्रवाई करते हुए विभाग ने कुछ सैंपल लेकर भोपाल लैब भेजे हैं, लेकिन तब तक जहरीला और दूषित खाना शहरवासियों के पेट में पहुंच चुका होगा। जानकारों का कहना है कि नोटिस देने के बाद जवाब के नाम पर सिर्फ लीपापोती की जाती है। यदि प्रशासन सच में गंभीर होता, तो मानकों की अनदेखी करने वाले इन लापरवाह होटलों और ढाबों को तुरंत सील कर दिया जाता। विभाग की इस ढुलमुल नीति और मेहरबानी के चलते होटल संचालकों के हौसले बुलंद हैं, जिससे आम जनता की जिंदगी को दांव पर लगाया जा रहा है।




