*पटवारी संघ का बड़ा फैसला बुरहानपुर समेत प्रदेशभर में पटवारी नहीं करेंगे स्वामित्व योजना के तहत रजिस्ट्री*

*नियमों को दरकिनार कर जिम्मेदारी थोपी जा रही-जिलाध्यक्ष राहुल सिंह तोमर*
बुरहानपुर :- मध्य प्रदेश पटवारी संघ (भोपाल) की बुरहानपुर शाखा ने केंद्र सरकार की स्वामित्व योजना के तहत दी जा रही आबादी भूमि की रजिस्ट्री प्रक्रिया में ‘निष्पादक के रूप में कार्य करने से पूरी तरह इनकार कर दिया है। सोमवार को आयोजित एक जिला स्तरीय प्रेस वार्ता में संघ के जिलाध्यक्ष राहुल सिंह तोमर ने पत्रकारों को संबोधित करते हुए इस निर्णय की घोषणा की।
पत्रकारों से चर्चा करते हुए राहुल सिंह तोमर ने स्पष्ट किया कि पटवारियों को कानूनी पचड़ों से बचाने और न्यायिक सुरक्षा प्रदान करने के लिए यह कदम उठाया गया है। उन्होंने कहा कि प्रचलित नियमों के अनुसार पटवारियों को रजिस्ट्री प्रक्रिया में निष्पादक बनने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है, फिर भी नियमों को दरकिनार कर उन पर यह जिम्मेदारी थोपी जा रही है। यह व्यवस्था मध्य प्रदेश भू-राजस्व संहिता की विभिन्न धाराओं का सीधा उल्लंघन करती है, जिससे भविष्य में पटवारियों के सामने गंभीर कानूनी और न्यायिक कठिनाइयां उत्पन्न होना तय है।
संघ ने योजना की वैधानिक, व्यावहारिक और तकनीकी खामियों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि स्वामित्व योजना के तहत हितग्राहियों को पहले ही ‘अधिकार अभिलेख प्रदान किया जा चुका है। इस अधिकार अभिलेख के बल पर हितग्राही स्वयं बैंक लोन, क्रय-विक्रय और अन्य शासकीय योजनाओं का लाभ लेने में सक्षम हैं। ऐसे में शासन द्वारा पटवारियों को निष्पादक बनाकर जबरन रजिस्ट्री कराने का कोई तर्कसंगत औचित्य नज़र नहीं आता।
बुरहानपुर जिले में इस योजना के अंतर्गत कुल 72,028 प्लॉटों की रजिस्ट्री कराने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। हालांकि, पटवारियों के विरोध और योजनागत खामियों के कारण 20 दिन बीत जाने के बावजूद जिले में एक भी रजिस्ट्री दर्ज नहीं हो सकी है। प्रदेशभर में इस बहिष्कार का व्यापक असर देखने को मिल रहा है।
अध्यक्ष राहुल सिंह तोमर ने दोहराया कि जब तक पटवारियों को निष्पादक के पद से हटाने, कानूनी सहायता प्रदान करने और विगत 28 वर्षों से चली आ रही वेतन विसंगति व कैडर रिव्यू जैसी जायज़ मांगों का स्थायी समाधान नहीं होता तब तक बुरहानपुर समेत पूरे मध्य प्रदेश के पटवारी इस कार्य से पूरी तरह दूर रहेंगे।




