*स्वामित्व योजना 2026 बुरहानपुर में 134 पटवारियों का कार्य बहिष्कार, कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन*

बुरहानपुर :- जिले के पटवारियों ने सरकार की ‘स्वामित्व अभिलेख निष्पादन व पंजीयन योजना-2026’ के तहत काम करने से स्पष्ट इनकार कर दिया है। मंगलवार को मध्य प्रदेश पटवारी संघ के बैनर तले 134 पटवारी कलेक्टर कार्यालय पहुंचे और अपनी मांगों को लेकर कलेक्टर के नाम डिप्टी कलेक्टर भागीरथ वाखला को ज्ञापन सौंपा। पटवारियों ने चेतावनी दी है कि वे योजना में सहयोगी की भूमिका तो निभा सकते हैं, लेकिन मुख्य निष्पादक के रूप में कार्य नहीं करेंगे।
निष्पादक बनाए जाने से बढ़ा विवाद का डर
मध्य प्रदेश पटवारी संघ के जिलाध्यक्ष राहुल सिंह तोमर ने बताया कि जिले के 148 हल्कों में कार्यरत 134 पटवारी इस योजना के तहत रजिस्ट्री निष्पादन का काम नहीं करेंगे। योजना में पटवारियों को सीधे निष्पादक बनाया गया है। पटवारियों की मुख्य चिंता यह है कि यदि भविष्य में किसी जमीन या प्लॉट की मलकियत को लेकर विवाद होता है, तो मामला अदालत तक पहुंचेगा। ऐसी स्थिति में कानूनी कार्रवाई और कोर्ट-कचहरी के चक्कर में पटवारियों को अपनी व्यक्तिगत जिम्मेदारी पर जवाब देना मुश्किल हो जाएगा ड्रोन सर्वे पर भी उठाए सवाल संघ ने ग्रामीण इलाकों में हुए ड्रोन सर्वे की सटीकता और गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठाए हैं। तोमर के अनुसार, ड्रोन सर्वे अलग-अलग तरीकों से किया गया है जिससे त्रुटियों की संभावना बढ़ गई है। यदि सर्वे में किसी पात्र व्यक्ति का नाम छूट जाता है या किसी गलत व्यक्ति का नाम दर्ज हो जाता है, तो भविष्य में ग्रामीणों के बीच संपत्ति विवाद गहरा जाएगा।
1 महीने की समय-सीमा पर विरोध
पटवारियों ने सरकार द्वारा इस पूरी प्रक्रिया को महज एक महीने में निपटाने के निर्देश पर भी कड़ा विरोध जताया है। उनका कहना है कि इतने कम समय में त्रुटिहीन काम करना व्यावहारिक रूप से असंभव है।
* निष्पादक की जिम्मेदारी में बदलाव* सरकार स्वयं या ग्राम पंचायत को निष्पादक बनाए, पटवारी केवल सहयोगी के रूप में कार्य करेंगे पटवारियों ने ‘फार्मर रजिस्ट्री और ‘जियो-टेक गिरदावरी’ का काम भी न करने का ऐलान किया है वेतन विसंगति दूर करने, ग्रेड-पे बढ़ाने, कैडर रिव्यू और समय पर पदोन्नति की मांग उठाई गई आश्वासन के बाद भी समाधान न होने से नाराजगी
पटवारी संघ ने याद दिलाया कि 3 अगस्त को प्रदेशव्यापी हड़ताल शुरू की गई थी, जिसे सरकार द्वारा तीन महीने में समस्याओं के निराकरण के आश्वासन के बाद स्थगित किया गया था। हालांकि, एक महीना बीत जाने के बाद भी मांगों पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। पटवारियों का कहना है कि सरकार के इस सुस्त रवैये से कैडर के भीतर भारी असंतोष और नाराजगी व्याप्त है। यदि समय रहते उनकी जायज मांगों पर विचार नहीं किया गया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।



