मजबूर नहीं, मजबूत बनकर जीवन में सफल बनें परिस्थितियों के सामने झुकने के बजाय हौसले से उनका सामना करें — मुनिश्री कुन्थुसागर महाराज

बुरहानपुर :- परम पूज्य मुनिश्री 108 कुन्थुसागर जी महाराज ने चातुर्मास के दौरान प्रेरणादायी प्रवचन में मजबूर और मजबूत शब्दों के माध्यम से जीवन की वास्तविकता को समझाते हुए कहा कि मनुष्य को मजबूर बनकर नहीं बल्कि मजबूत बनकर जीवन जीना चाहिए। परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों, उनसे घबराने के बजाय धैर्य, आत्मविश्वास और पुरुषार्थ के साथ उनका सामना करना चाहिए। मुनिश्री ने कहा कि मजबूर व्यक्ति परिस्थितियों के सामने हार मान लेता है जबकि मजबूत व्यक्ति परिस्थितियों से संघर्ष कर उन्हें बदलने का प्रयास करता है। मजबूर व्यक्ति परेशानी आने पर सोचता है कि मैं क्या कर सकता हूं? वहीं मजबूत व्यक्ति कहता है कि “मैं इसका समाधान जरूर निकालूंगा। यही सोच व्यक्ति को कठिन परिस्थितियों से बाहर निकालने का मार्ग दिखाती है।
मुनिश्री ने समझाया कि मजबूर व्यक्ति दूसरों को दोष देता है, जबकि मजबूत व्यक्ति अपनी जिम्मेदारी स्वीकार करता है। मजबूर व्यक्ति रास्ता बंद देखता है, जबकि मजबूत व्यक्ति नया रास्ता खोजता है मजबूर व्यक्ति परेशानी से डरता है, जबकि मजबूत व्यक्ति परेशानी से सीखता है। इसी प्रकार मजबूर व्यक्ति असफलता में रुक जाता है, जबकि मजबूत व्यक्ति असफलता से सीख लेकर दोबारा प्रयास करता है। उन्होंने कहा कि मजबूत बनना केवल शरीर की ताकत का विषय नहीं है, बल्कि यह मन की शक्ति से जुड़ा है। मन मजबूत होगा तो कठिन से कठिन परिस्थिति में भी व्यक्ति अपना धैर्य नहीं खोएगा। आत्मविश्वास, संयम, सकारात्मक सोच और पुरुषार्थ ही व्यक्ति को मजबूर से मजबूत बनाते हैं। मुनिश्री ने कहा, “परिस्थितियां हमें मजबूर बना सकती हैं, लेकिन परिस्थितियों के सामने झुकना या मजबूत बनकर खड़ा होना हमारे हाथ में है।
समाज के प्रमुख कार्यकर्ता प्रमोद कुमार बड़जात्या एवं महेन्द्र जैन लुहाडिया ने बताया की प्रवचन के प्रारंभ में समाजजनों द्वारा मुनिश्री के सानिध्य में मंत्र जाप, ध्यान योग एवं आचार्य श्री की पूजन की गई।
इस अवसर पर स्वरूपचंद जैन, हितेश पाटनी, सुरेंद्र पाटनी, संतोष सोनी, महावीर जी सोनी, प्रेमचंद सिंघई, गौरव लुहाडिया, दिलीप पहाड़िया के साथ साथ बड़ी संख्या में महिलाए व समाजजन उपस्थित रहे मुनिश्री के दर्शन एवं प्रवचन का लाभ लेने के लिए बुरहानपुर सहित आसपास के शहरों एवं गांवों से प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। प्रवचन के माध्यम से श्रद्धालुओं को आत्मबल, संयम और सकारात्मक सोच के साथ जीवन जीने की प्रेरणा मिल रही है।



