*बुरहानपुर नया फोरलेन बाईपास बनने से 250 मैकेनिकों पर मंडराया रोजी-रोटी का संकट, कलेक्टर से पुनर्वास की गुहार*
बुरहानपुर:- मंगलवार को कलेक्ट्रेट कार्यालय में आयोजित जनसुनवाई में शहर के मैकेनिकों ने पहुंचकर कलेक्टर को एक ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन के जरिए मैकेनिकों ने नए फोरलेन हाईवे के कारण उनके सामने खड़े हुए गंभीर आजीविका संकट की ओर ध्यान आकर्षित किया और रिक्त भूमि पर दुकान आवंटित कर पुनर्वास की मांग की।
ज्ञापन में बताया गया कि इंदौर-इच्छापुर हाईवे पूर्व में बुरहानपुर स्थित ट्रांसपोर्ट नगर से होकर गुजरता था। इसी ट्रांसपोर्ट नगर में मैकेनिक नगर भी स्थित है, जहां लगभग 250 मैकेनिकों की छोटी-छोटी कच्ची और पक्की दुकानें हैं। फोर व्हीलर वाहन, जीप, ट्रक, ट्राले और कंटेनर मरम्मत व ग्रीसिंग के लिए यहीं रुकते थे। पिछले कई वर्षों से ये मैकेनिक इसी कार्य से अपने परिवार का पालन-पोषण कर रहे थे और उनके बच्चों की शिक्षा व परवरिश इसी रोजगार पर निर्भर थी।
*बाईपास होने से ठप हुआ कारोबार*
मैकेनिक शेख शौकत ने बताया कि हाल ही में निर्मित नया फोरलेन हाईवे अब ग्राम झिरी से ग्राम उमरदा होते हुए ग्राम जैनाबाद के पास मुख्य मार्ग से जुड़ गया है। इस नए रूट के कारण पुराना ट्रांसपोर्ट नगर और मैकेनिक नगर पूरी तरह बाईपास हो गया है। मैकेनिकों का कहना है कि अब भारी वाहन इस रास्ते पर नहीं आएंगे, जिससे उनका व्यवसाय पूरी तरह ठप हो जाएगा और 250 से अधिक मैकेनिक परिवार बेरोजगार हो जाएंगे।
*30 वर्ष के पट्टे भी हुए बेअसर*
मैकेनिकों ने ज्ञापन में उल्लेख किया कि नगर निगम बुरहानपुर ने उन्हें मैकेनिक नगर में 30 वर्षों के पट्टे आवंटित किए हैं। लेकिन जब इस मार्ग पर वाहनों का आवागमन ही नहीं रहेगा, तो इन पट्टों और दुकानों का कोई औचित्य नहीं रह जाएगा।
*पुनर्वास के लिए दिए दो विकल्प*
मैकेनिक शेख मोहम्मद हफीज ने कहा रोजगार को सुचारू रखने के लिए मैकेनिकों ने नए फोरलेन पर विस्थापन की मांग की है। इसके लिए उन्होंने दो विकल्प भी सुझाए हैं ग्राम झिरी नए फोरलेन हाईवे के पास काफी सरकारी भूमि रिक्त पड़ी है, जहां दुकानें आवंटित की जा सकती हैं ग्राम उमरदा नए हाईवे के समीप रिक्त पड़ी भूमि पर भी मैकेनिकों को बसाया जा सकता है।
मैकेनिकों ने चेतावनी भरे लहजे में गुहार लगाई कि यदि समय रहते उन्हें नए हाईवे पर विस्थापित नहीं किया गया, तो उनके परिवारों के सामने भुखमरी की नौबत आ जाएगी और उनके बच्चों की पढ़ाई-लिखाई छूट जाएगी। ज्ञापन के अंत में कलेक्टर से मांग की गई कि जनहित और मानवीय दृष्टिकोण को ध्यान में रखते हुए मैकेनिकों को प्रस्तावित स्थलों पर विस्थापित करने की त्वरित व्यवस्था की जाए।




