पुरुषोत्तम मास की पावन कथा का उदासीन आश्रम में हुआ समापन, मजदूर यूनियन अध्यक्ष ठाकुर प्रियांक सिंह ने 51 हजार का दिया दान

बुरहानपुर । पुरुषोत्तम मास (अधिक मास) के पावन एवं दिव्य अवसर पर श्री उदासीन आश्रम, नागझिरी, बुरहानपुर में आयोजित “ज्ञानमय दर्शन एवं प्रवचनमाला” का भव्य समापन समारोह आज संपन्न हुआ। 17 मई से प्रारंभ हुई यह कथा 15 जून को पूर्ण हुई जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने भाग लिया। इस आध्यात्मिक यात्रा ने भक्तों के हृदयों को प्रभु भक्ति, ज्ञान और वैराग्य की गंगा से सिंचित किया।
समारोह में उदासीन आश्रम समिति के सदस्य ठाकुर प्रियांक सिंह ने मंदिर निर्माण एवं विकास हेतु 51,000 रुपये का नगद दान दिया। व्यास पीठ पर विराजमान स्वामी योगेश्वरानंद महाराज ने ठाकुर प्रियांक सिंह का हार्दिक स्वागत किया और उनकी इस पुण्यात्मा सेवा की सराहना की। महंत पुष्करानंद महाराज ने भी समिति सदस्य का स्वागत करते हुए उनको आशीर्वाद दिया। स्वामी योगेश्वरानंद जी ने कथा का पाठ किया और उपस्थित भक्तों को बताया कि ऐसे दान और सत्संग का महत्व अत्यंत पावन है।
कार्यक्रम की प्रमुख विशेषताएं:
पुरुषोत्तम मास भगवान श्रीकृष्ण द्वारा स्वीकृत विशेष मास है, जिसमें की गई साधना, कथा-श्रवण, आरती और दान करोड़ों पुण्यों के समान फल प्रदान करते हैं। पूरे मास भर आश्रम में ज्ञानमय प्रवचन, दर्शन और भक्ति कार्यक्रम चले, जिनमें संतों के मुखारविंद से ज्ञान-गंगा बहती रही।
महंत पुष्कारानंद स्वामी ने बताया श्री उदासीन आश्रम, उदासीन संप्रदाय का एक महत्वपूर्ण केंद्र है, जहां नियमित रूप से धार्मिक एवं आध्यात्मिक गतिविधियां संचालित होती है। संतोष देवताले व प्रकाश पालीवाल ने कहा पुरुषोत्तम मास जैसे अवसरों पर यहां का वातावरण विशेष रूप से पावन हो जाता है। मुकेश डालमिया व भानु चंचलानी ने बताया कि कथा समापन समारोह में प्रभु की भव्य आरती, सामूहिक भजन-कीर्तन और संतों के आशीर्वचन हुए। श्रद्धालु दिव्य वातावरण में डूबे रहे।
समिति सदस्य मुकेश पाटीदार व हितेश भावसार ने कहा इस आध्यात्मिक माहौल में प्रभु की आरती करने और पूज्य संतों का पावन आशीर्वाद प्राप्त कर मन अत्यंत हर्षित और कृतार्थ है। राजू भावसार एवं दिलीप चौधरी ने बताया कि संतों का सानिध्य और उनके मुखारविंद से झरी ज्ञानगंगा जीवन को सही दिशा देने वाली है।
ठाकुर प्रियांक सिंह ने दान देते हुए कहा कि संतों के सानिध्य में सेवा करना प्रत्येक भक्त का कर्तव्य है। स्वामी योगेश्वरानंद महाराज ने सभी को जीवन में भक्ति, ज्ञान और दान की महत्ता पर बल देते हुए मार्गदर्शन किया।
इस अवसर पर आश्रम समिति, संतगण और श्रद्धालु भाई-बहनों ने ठाकुर प्रियांक सिंह सहित सभी दानदाताओं और आयोजकों का आभार व्यक्त किया। ऐसे कार्यक्रम समाज में सकारात्मक ऊर्जा, नैतिक मूल्यों और आध्यात्मिक जागृति का प्रसार करते हैं।



