प्राचीन स्वामीनारायण मंदिर में भगवान लक्ष्मी नारायण देव हरीकृष्ण महाराज का भव्य दिव्य अभिषेक

बुरहानपुर। पावन पुरुषोत्तम मास एवं पद्मिनी एकादशी के शुभ अवसर पर बुरहानपुर के प्राचीन स्वामीनारायण मंदिर में भगवान लक्ष्मी नारायण देव हरीकृष्ण महाराज का भव्य दिव्य अभिषेक बड़े ही श्रद्धा और उल्लास के साथ सम्पन्न हुआ। अभिषेक के दिव्य दर्शनों के लिए सुबह से ही मंदिर परिसर में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी।
मंदिर में भगवान का अभिषेक 500 लीटर दूध, जामुन का जूस, आम का रस, गन्ने का रस, ककड़ी का जूस, नारियल पानी, शक्कर, शहद, पांच नदियों के जल, दही एवं घी सहित विभिन्न पवित्र सामग्री से वैदिक मंत्रोच्चार और वाद्य यंत्रों की मंगल ध्वनि के बीच किया गया। दिव्य अभिषेक में मंदिर के मीडिया प्रभारी गोपाल देवकर, हरिभक्त अशोक शाह, उमेश शाह, सुभाष भाई सहित अनेक श्रद्धालुओं ने लाभ लिया।
मीडिया प्रभारी गोपाल देवकर ने जानकारी देते हुए बताया कि दिव्य अभिषेक के पश्चात भगवान लक्ष्मी नारायण देव हरीकृष्ण महाराज का लगभग 25 किलो गुलाब की पंखुड़ियों से भव्य राज्योपचार किया गया। मंदिर परिसर में भक्ति और श्रद्धा का अद्भुत वातावरण देखने को मिला। अभिषेक से निकले पवित्र तीर्थ को भी श्रद्धालुओं ने श्रद्धापूर्वक ग्रहण किया।
इस अवसर पर मंदिर के महंत कोठारी पी स्वामी, दिनेश भगत, शास्त्री चंद्र प्रकाश स्वामी, शास्त्री चिंतन प्रियदास जी, स्वरज भगत सहित मंदिर के अनेक हरिभक्त व्यवस्थाओं में जुटे रहे।
दिव्य अभिषेक के पश्चात व्यासपीठ से कथा का रसपान कराते हुए शास्त्री चिंतन प्रियदास जी ने पद्मिनी एकादशी एवं व्यतिपात योग के महत्व का विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने कहा कि पुरुषोत्तम मास की पद्मिनी एकादशी अत्यंत पुण्यदायी मानी गई है और यह व्रत व्यक्ति को वैकुंठ की प्राप्ति कराने वाला है। उन्होंने कहा कि इस व्रत की शुरुआत दशमी तिथि से ही हो जाती है, जिसमें साधारण भोजन, भूमि पर शयन और ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए।
उन्होंने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि पद्मिनी एकादशी का व्रत करने से सभी व्रतों का पुण्यफल प्राप्त होता है। साथ ही उन्होंने व्यतिपात योग के महत्व को समझाते हुए बताया कि सूर्य और चंद्रमा की दृष्टिपात से उत्पन्न भयंकर पुरुष को व्यतिपात कहा गया है। सूर्य और चंद्रमा ने उसे सभी पुण्यकालों का स्वामी होने का वरदान दिया है।
शास्त्री चिंतन प्रियदास जी ने कहा कि व्यतिपात योग में दान देना अनिवार्य माना गया है। जो व्यक्ति इस दिन दान करता है, उसका कल्याण होता है और उसे अनंत गुना पुण्यफल प्राप्त होता है। वहीं जो व्यक्ति दान नहीं करता, वह व्यतिपात के दुष्प्रभावों से पीड़ित हो सकता है। उन्होंने कहा कि बुरहानपुर में विराजमान लक्ष्मीनारायण देव सभी मनोरथ पूर्ण करने वाले हैं और मोक्ष का मार्ग प्रदान करने वाले हैं।
कार्यक्रम के दौरान मंदिर परिसर हरिनाम संकीर्तन, भजन एवं जयघोषों से भक्तिमय बना रहा। कार्यक्रम का मंच संचालन नटवर भगत द्वारा किया गया।



