*ऑल इंडिया मिल्ली काउंसिल की चेतावनी UCC के खिलाफ बुरहानपुर से दिल्ली तक उठी विरोध की आवाज़ जरूरत पड़ी तो जाएंगे सुप्रीम कोर्ट*

बुरहानपुर :- समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर देशभर में चल रही बहसों के बीच ऑल इंडिया मिल्ली काउंसिल (मध्य प्रदेश) ने इसके खिलाफ एक बड़ा आंदोलन और कानूनी मुहिम शुरू कर दी है। बुरहानपुर से शुरू हुआ यह विरोध भोपाल होते हुए अब देश की राजधानी दिल्ली तक पहुँच गया है। काउंसिल ने शासन और प्रशासन को अपनी संवैधानिक आपत्तियों से अवगत कराते हुए साफ कर दिया है कि वह इस मुद्दे पर किसी भी तरह का समझौता नहीं करेगी।
*राष्ट्रपति को सौंपा उच्चस्तरीय मेमोरेंडम*
बुरहानपुर में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ऑल इंडिया मिल्ली काउंसिल के पदाधिकारी वाजिद इकबाल ने बताया कि 17 तारीख को दिल्ली में उच्च स्तर पर एक विशेष ज्ञापन (मेमोरेंडम) सौंपा गया। इसके ज़रिए महामहिम राष्ट्रपति के समक्ष संसद या सदन के स्तर पर UCC को आगे बढ़ाने के किसी भी प्रयास के खिलाफ औपचारिक और कानूनी विरोध दर्ज कराया गया है। संगठन का कहना है कि वे इस कानून को जबरन लागू करने से रोकने के लिए संवैधानिक दायरे में रहकर हर संभव कदम उठाएंगे।
*धार्मिक स्वतंत्रता और मौलिक अधिकारों पर हमला*
वाजिद इकबाल ने संविधान के अनुच्छेद 25 से 28 का जिक्र करते हुए कहा कि भारत का संविधान हर नागरिक को अपनी आस्था, परंपराओं और पर्सनल लॉ के अनुसार जीने का मौलिक अधिकार देता है। संगठन का आरोप है कि UCC को जबरन थोपना नागरिकों के धार्मिक और संवैधानिक अधिकारों पर सीधा हमला है, जिसे किसी भी लोकतांत्रिक देश में स्वीकार नहीं किया जा सकता।
*विविधता में एकता’ को नुकसान पहुँचाने की आशंका*
काउंसिल ने जोर देकर कहा कि भारत विभिन्न धर्मों, जातियों और जनजातियों की अनोखी परंपराओं का देश है। एकरूपता लाने के नाम पर सदियों पुरानी सांस्कृतिक पहचान को खत्म करना देश की एकता, अखंडता और सामाजिक सौहार्द के लिए हानिकारक साबित हो सकता है।
*21वें विधि आयोग की रिपोर्ट का दिया हवाला*
इस विरोध अभियान में 21वें विधि आयोग की रिपोर्ट का भी प्रमुखता से उल्लेख किया गया है। आयोग ने माना था कि भारत जैसे विविध देश में समान नागरिक संहिता “न तो आवश्यक है और न ही वांछनीय”। काउंसिल ने सवाल उठाया कि जब देश की सर्वोच्च कानूनी संस्था इसे गैर-जरूरी बता चुकी है, तो इसे लागू करने की जिद समझ से परे है।
*उच्च न्यायालय से सर्वोच्च न्यायालय तक लड़ाई का ऐलान*
प्रेस कॉन्फ्रेंस में काउंसिल के पदाधिकारी फहीम हाशमी ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने उनकी लोकतांत्रिक आपत्तियों की अनदेखी की, तो यह मामला सिर्फ ज्ञापनों तक सीमित नहीं रहेगा। संगठन इस मुद्दे को मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय से लेकर सर्वोच्च न्यायालय तक ले जाएगा और कानूनी स्तर पर अपनी लड़ाई अंतिम मुकाम तक लड़ेगा।




