बुरहानपुर

आज पूर्णिमा पर श्री स्वामीनारायण मंदिर में होगा 1001 लीटर दुग्धाभिषेक, 1000 किलो फलों से मनाया जाएगा फलोत्सव

बुरहानपुर। सीलमपुरा स्थित 200 वर्ष प्राचीन श्री स्वामीनारायण मंदिर में रविवार 31 मई को पूर्णिमा पर्व के अवसर पर भगवान लक्ष्मी नारायण देव एवं हरिकृष्ण महाराज के विशेष दिव्य अभिषेक और पूजन का भव्य आयोजन किया जाएगा। मंदिर में 1001 लीटर दूध, विभिन्न फलों के रस, शर्करा और सुगंधित द्रव्यों से भगवान का महाअभिषेक किया जाएगा। इसके साथ ही 51 किलो पुष्पों से विशेष राजोपचार एवं 1000 किलो फलों से भव्य फलोत्सव मनाया जाएगा।
मंदिर के महंत कोठारी पी.पी. स्वामी ने बताया कि पूर्णिमा का दिन भगवान लक्ष्मी नारायण देव की विशेष आराधना का पर्व माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धापूर्वक पूनम भरने वाले भक्तों की मनोकामनाएं भगवान पूर्ण करते हैं। श्रद्धालु शक्कर, नारियल, फल और दक्षिणा अर्पित कर भगवान से सुख, समृद्धि और वैभव की कामना करते हैं।
इस अवसर पर व्यासपीठ से कथा वाचन करते हुए शास्त्री चिंतनप्रियदासजी स्वामी ने श्रद्धा और सत्संग के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि “भगवान की इच्छा से ही मनुष्य की इच्छा पूर्ण होती है।” उन्होंने कहा कि जैसे किसान बीज बोने के बाद धैर्यपूर्वक फसल की प्रतीक्षा करता है, उसी प्रकार भक्त को भी श्रद्धा और धैर्य के साथ भगवान पर विश्वास रखना चाहिए। शास्त्रों में भी कहा गया है कि श्रद्धा ही भक्ति की जड़ है और बिना श्रद्धा के आध्यात्मिक उन्नति संभव नहीं है।
स्वामीजी ने कहा कि “श्रद्धा का लक्षण धैर्य होता है।” नियमित सत्संग, शास्त्रों का अध्ययन और भगवान को समय देने से श्रद्धा बढ़ती है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे दीपक में निरंतर तेल डालने से उसकी ज्योति प्रज्वलित रहती है, वैसे ही सत्संग और शास्त्र चिंतन से श्रद्धा की ज्योति प्रबल होती है। श्रद्धावान व्यक्ति भगवान की आज्ञा का पालन करता है, विनम्र रहता है और सेवा को अपना सौभाग्य मानता है।
कथा के दौरान गुणातीतानंद स्वामी के बुरहानपुर प्रवास का भी उल्लेख किया गया। बताया गया कि भगवान स्वामीनारायण की आज्ञा से गुणातीतानंद स्वामी बुरहानपुर पहुंचे और तीन माह तक यहां रहकर सत्संग एवं आध्यात्मिक संस्कारों का विस्तार किया। साधु जीवन में महिलाओं से दूरी की परंपरा होने के बावजूद भगवान की आज्ञा का पालन करते हुए उन्होंने महिलाओं के बीच भी सत्संग की स्थापना की। उसी परंपरा का परिणाम है कि आज बुरहानपुर में महिलाओं का स्वतंत्र सत्संग संचालित हो रहा है।
मध्यप्रदेश में स्वामीनारायण संप्रदाय का यह एकमात्र स्थान है जहां महिलाओं के लिए पृथक मंदिर स्थापित किया गया है। यह मंदिर विशेष रूप से आध्यात्मिक जीवन अपनाने वाली बहनों एवं वृद्ध महिलाओं के लिए समर्पित है। यहां केवल महिलाओं को ही प्रवेश की अनुमति है और वे स्वतंत्र रूप से भक्ति, सत्संग एवं धार्मिक गतिविधियों में भाग लेती हैं।
पूर्णिमा महोत्सव में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है। मंदिर परिसर को आकर्षक रूप से सजाया गया है तथा देश-विदेश से आने वाले हरिभक्तों के स्वागत की तैयारियां पूर्ण कर ली गई हैं।

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