बुरहानपुर में माँ ताप्ती नदी परिक्रमा यात्रा का भव्य स्वागत एवं भंडारा संपन्न

बुरहानपुर। पावन ताप्ती नदी की वार्षिक परिक्रमा यात्रा के अंतर्गत परिक्रमा वासी श्रद्धालुओं का ब्रघ्नपुर नगर में भव्य एवं श्रद्धापूर्वक स्वागत किया गया। प्रातः 10 बजे यात्रा का नगर में प्रवेश हुआ, जहाँ विभिन्न सामाजिक एवं धार्मिक संगठनों तथा नगरवासियों ने पुष्पवर्षा एवं जयघोष के साथ परिक्रमा वासियों का अभिनंदन किया। यात्रा बहादरपुर रोड से होते हुए CK ग्रीन, चाणक्यपुरी, लक्ष्मी नगर एवं सिंधी बस्ती मार्ग से गुजरी। मार्ग में स्थान-स्थान पर श्रद्धालुओं द्वारा स्वागत, जलपान एवं सेवा की व्यवस्था की गई।
माँ ताप्ती परिक्रमा सेवा समिति, ब्रघ्नपुर के सदस्य श्री धीरज नावानी द्वारा कार्यक्रम की विस्तृत जानकारी दी गई। दोपहर 12 बजे सिंधी बस्ती स्थित पुरुषार्थी विद्यालय के पास माँ ताप्ती की विधिवत आरती का आयोजन संपन्न हुआ। आरती में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और भक्तिमय वातावरण में सभी ने दर्शन लाभ प्राप्त किया। तत्पश्चात भंडारा प्रसाद का वितरण किया गया, जिसमें श्रद्धालुओं एवं परिक्रमा वासियों ने प्रसाद ग्रहण किया। यात्रा दोपहर 3 बजे यात्रा पुरुषार्थी विद्यालय से प्रस्थान कर राजघाट पहुँची, जहाँ विधिवत महापौर श्रीमती माधुरी पटेल, पूर्व महापौर श्री अतुल पटेल, निगम अध्यक्ष श्रीमती अनीता अमर यादव सहित सभी श्रद्धालुओ ने माँ ताप्ती का आरती-पूजन किया। इसके पश्चात परिक्रमावासी श्रद्धालु श्रीरोकड़िया हनुमान मंदिर पहुँचे, जहाँ समिति द्वारा रात्रि भोजन की व्यवस्था की गई। श्री रोकड़िया हनुमान मंदिर में श्री नरेंद्र वाणी, श्री जोशी, श्री श्रॉफ उपस्थित रहे। प्रातःकाल यात्रा अगले चरण हेतु नेपानगर के लिए प्रस्थान करेगी।

श्री संजय पाटनकर मुल्ताई ने बताया पौराणिक ग्रंथों के अनुसार माँ ताप्ती सूर्यदेव की पुत्री हैं, इसलिए उन्हें “सूर्यतनया” के नाम से भी जाना जाता है। मान्यता है कि सूर्यदेव के तेज से उत्पन्न होने के कारण ताप्ती में विशेष आध्यात्मिक ऊर्जा निहित है। स्कंद पुराण सहित विभिन्न पुराणों में ताप्ती नदी का महात्म्य विस्तार से वर्णित है। ताप्ती महात्म्य के अनुसार इस नदी में स्नान, तट पर तप, दान एवं जप करने से मनुष्य के पाप नष्ट होते हैं और उसे अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। स्कंद पुराण में वर्णित ‘ताप्ती महात्म्य’ के अनुसार श्रद्धापूर्वक माँ ताप्ती के पावन नाम का स्मरण मात्र करने से ही श्रद्धालु को गंगा नदी में स्नान तथा नर्मदा नदी के दर्शन के समान महान पुण्य फल की प्राप्ति होती है। ताप्ती नदी में स्नान करने से मानसिक संताप दूर होते हैं और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। ताप्ती परिक्रमा आध्यात्मिक साधना का उत्तम मार्ग है, जिसमें श्रद्धालु पूर्ण श्रद्धा, संयम और नियमों का पालन करते हुए नदी के दोनों तटों की परिक्रमा करते हैं। यह यात्रा त्याग, तपस्या और आत्मशुद्धि का प्रतीक मानी जाती है। पौराणिक ग्रंथों में उल्लेख मिलता है कि ताप्ती नदी के तट पर अनेक ऋषि-मुनियों ने तपस्या की थी, जिससे यह भूमि तपोभूमि के रूप में प्रतिष्ठित हुई। इसी कारण ताप्ती को “पाप-नाशिनी” और “मोक्षदायिनी” की संज्ञा दी जाती है।
श्री बलराज नावानी ने बताया ताप्ती जी का उद्गम बैतूल के मुलताई क्षेत्र में सतपुड़ा पर्वत श्रृंखला से लगभग 752 मीटर की ऊँचाई पर स्थित पवित्र कुंड से होता है। ताप्ती मां भारत की पश्चिम वाहिनी नदियों में एक प्रमुख नदी है, जो पूर्व से पश्चिम की दिशा में प्रवाहित होती है — जो कि भारतीय नदियों में अपेक्षाकृत दुर्लभ है। लगभग 724 किमी लंबी यह नदी मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र और गुजरात राज्यों से होकर खंभात की खाड़ी (रत्न सागर) सूरत क्षेत्र में मिलती है। ताप्ती नदी का प्रवाह क्षेत्र (बेसिन) लगभग 65,000 वर्ग किमी में फैला हुआ है, जो कृषि, सिंचाई और पेयजल की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसकी प्रमुख सहायक नदियों में पूरना, गिरना, पांजरा, वाघुर तथा बोरी आदि सम्मिलित हैं। बुरहानपुर, भुसावल और सूरत जैसे महत्वपूर्ण नगर इसके तट पर बसे हुए हैं। ताप्ती घाटी कृषि उत्पाद के लिए विशेष रूप से प्रसिद्ध है, जिससे क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलती है। ऐतिहासिक रूप से भी ताप्ती नदी का महत्व रहा है, क्योंकि इसके तटवर्ती क्षेत्र प्राचीन व्यापारिक मार्गों और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के केंद्र रहे हैं। नदी के किनारे स्थित घाट, मंदिर और प्राचीन संरचनाएँ इसकी सांस्कृतिक धरोहर को दर्शाती हैं।
ज्ञात रहे ब्रघ्नपुर (बुरहानपुर) निवासी ओमप्रकाश शर्मा एवं बलराज ना. नावानी 4 वर्ष पूर्व साइकिल द्वारा संपूर्ण ताप्ती नदी परिक्रमा पूर्ण कर चुके हैं। उनकी यह साधना एवं साहस नगर के लिए गौरव का विषय है तथा वर्तमान पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत है। ऐसे तपस्वी परिक्रमावासियों की भावना से ही ताप्ती परिक्रमा की परंपरा सशक्त एवं जीवंत बनी हुई है। कार्यक्रम में ओमप्रकाश शर्मा, बलराज नावानी, नरहरि दीक्षित, सुदामा नावानी, टेकचंद नावानी, कीमत मतवानी, मनोज फुलवानी, नारायण वासवानी, देवराम महाजन, शिवदास मोहनानी, दयाराम मूलचंदानी, देवीदास रामानी, हरीश चंचलानी, रूपचंद वाधवानी, सतपाल ओटवानी, रवि जगनानी, अभिषेक नावानी, निखिल खंडेलवाल, भारत रोचलानी, योगेश पोहानी, राहुल मलानी सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे।



