सीबीएसई 12वीं परिणाम 2026 : क्या ऑन-स्क्रीन मार्किंग ने बदली मेरिट की तस्वीर? चतुर्वेदी- शिक्षाविद

मध्यप्रदेश। वर्ष 2026 में घोषित हुए सीबीएसई कक्षा 12वीं के परिणामों ने शिक्षा जगत में एक नई बहस को जन्म दे दिया है। इस बार विशेष रूप से विज्ञान वर्ग के विद्यार्थियों के परिणाम अपेक्षा से कम देखने को मिले। कई ऐसे छात्र, जिन्होंने जेईई मेन जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया, वे बोर्ड परीक्षा में 75% का आवश्यक मानदंड भी पूरा नहीं कर सके। इसके पीछे सबसे बड़ा कारण “ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम (OSM)” और “स्टेप मार्किंग” को माना जा रहा है।
सीबीएसई द्वारा इस वर्ष उत्तर पुस्तिकाओं की जांच पूरी तरह डिजिटल माध्यम से की गई। बोर्ड का उद्देश्य मूल्यांकन प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, निष्पक्ष और त्रुटिरहित बनाना था। परंतु इसका प्रभाव विद्यार्थियों के अंकों पर स्पष्ट रूप से दिखाई दिया। विशेषकर मैथ्स, फिजिक्स और केमिस्ट्री जैसे विषयों में छात्रों के अंक अपेक्षाकृत कम आए।
पहले कई बार ऐसा देखा जाता था कि यदि अंतिम उत्तर सही हो, तो विद्यार्थियों को अधिकांश अंक मिल जाते थे। लेकिन इस बार मूल्यांकन में केवल अंतिम उत्तर नहीं, बल्कि हर स्टेप, प्रस्तुतीकरण और उत्तर लिखने की प्रक्रिया को विशेष महत्व दिया गया। जिन छात्रों ने सीधे उत्तर लिखे, फार्मूला नहीं दर्शाया या आवश्यक स्टेप्स छोड़े, उनके अंक कट गए।
इस बदलाव का सबसे बड़ा प्रभाव उन विद्यार्थियों पर पड़ा जो इंजीनियरिंग और तकनीकी संस्थानों में प्रवेश की तैयारी कर रहे हैं। IIT, NIT तथा अन्य प्रमुख संस्थानों में प्रवेश के लिए 75% बोर्ड अंक का मानदंड महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में कई मेधावी छात्र, जो प्रतियोगी परीक्षाओं में सफल रहे, बोर्ड प्रतिशत के कारण मानसिक दबाव और निराशा का सामना कर रहे हैं।
हालांकि शिक्षा विशेषज्ञों का एक वर्ग इसे सकारात्मक परिवर्तन भी मान रहा है। उनका कहना है कि यह प्रणाली रटने की प्रवृत्ति को कम करेगी और विद्यार्थियों को व्यवस्थित एवं अवधारणात्मक अध्ययन के लिए प्रेरित करेगी। केवल उत्तर याद कर लेना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि समाधान की प्रक्रिया को समझना भी आवश्यक होगा।
दूसरी ओर, अभिभावकों और छात्रों का मानना है कि बोर्ड को इस प्रकार के बड़े बदलावों के लिए पहले से पर्याप्त जागरूकता फैलानी चाहिए थी। यदि छात्रों और शिक्षकों को पहले स्पष्ट दिशा-निर्देश मिलते, तो परिणाम इतने प्रभावित नहीं होते।
आज आवश्यकता इस बात की है कि विद्यालयों में केवल “सही उत्तर” पर नहीं, बल्कि “सही प्रक्रिया” पर भी समान रूप से ध्यान दिया जाए। विद्यार्थियों को उत्तर लेखन शैली, स्टेप मार्किंग और प्रस्तुतीकरण का नियमित अभ्यास कराया जाना चाहिए।
सीबीएसई का यह नया मूल्यांकन मॉडल भविष्य की शिक्षा प्रणाली की दिशा अवश्य तय कर सकता है, लेकिन इसके साथ छात्रों को उचित मार्गदर्शन और मानसिक सहयोग देना भी उतना ही आवश्यक है। शिक्षा का उद्देश्य केवल अंक नहीं, बल्कि वास्तविक समझ और संतुलित विकास होना चाहिए।



